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मंदिरो का विवरण

उज्जैन, आज भी मंदिरों और पुरानी परम्पराओं को एक-दूसरे से जोड़े हुए है। समय के थपेड़ों ने कई प्राचीन मंदिरों को जीर्ण-शीर्ण कर दिया है, लेकिन जनमानस की आस्थाओं की तरह दृढ़ ये मंदिर आज भी खड़े हैं। श्रद्धालु और सरकार समय-समय पर इन मंदिरों का जीर्णोद्धार करते रहे हैं। उज्जैन की परम्पराएँ और मंदिर पुरातन काल की भाँति आज भी अक्षुण्ण बनी हुई हैं।

 

श्री चिंतामण गणेश मन्दिर श्री चिंतामण गणेश मन्दिर

भगवान गणेश का यह मन्दिर क्षिप्रा नदी के समीप फ़तेहाबाद रेलवे लाइन पर स्थित है। यह माना जाता है कि इस मंदिर में स्‍थापित गणेश जी की प्रतिमा स्वयंभू है। उनके दोनों ओर उनकी पत्नियां रिद्धि और सिद्धि विराजमान हैं।

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श्री महाकालेश्वर मन्दिर श्री महाकालेश्वर मन्दिर

उज्जैन के अधिपति भगवान शिव की महिमा यहाँ के कण-कण में विराजमान हैं। भारत के हृदयस्थल मध्यप्रदेश के उज्जैन में पुण्य सलिला क्षिप्रा के तट के निकट भगवान शिव 'महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग' के रूप में विराजमान हैं।

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हरसिद्धि मन्दिर हरसिद्धि मन्दिर

उज्जैन के प्राचीन पवित्र स्थलों की आकाशगंगा में यह मन्दिर एक विशेष स्थान रखता है। यह मंदिर देवी अन्नपूर्णा को समर्पित है जो गहरे सिंदूरी रंग में रंगी है। देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति देवी महालक्ष्मी और देवी सरस्वती की मूर्तियों के बीच विराजमान है।

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बड़े गणेशजी का मन्दिर बड़े गणेशजी का मन्दिर

यह मन्दिर महाकालेश्वर मन्दिर के पास एक तालाब के ऊपर स्थित है, जिसमें भगवान शिव के सुपुत्र की विशाल कलात्मक प्रतिमा स्थापित है। यह शहर में स्थित पारम्परिक मंदिरों में से एक माना जाता है।

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श्री रामजनार्दन मन्दिर श्री रामजनार्दन मन्दिर

प्राचीन विष्णु सागर के तट पर स्थित यह विशाल परकोटे से घिरा मंदिर समूह है। इसमें एक राममंदिर है दूसरा जनार्दन (विष्णु) का मंदिर है। इसे सवाई राजा एवं मालवा के सूबेदार जयसिंह ने बनवाया था। परकोटा तथा कुण्ड मराठाकाल में निर्मित हुए। होल्कर महारानी अहिल्याबाई ने इसका जीर्णोद्धार कराया था।

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नगरकोट की रानी का मन्दिर नगरकोट की रानी का मन्दिर

स्थूल रूप से यह प्रतीत होता है कि यह नगरकोट के परकोटे की रक्षिका देवी है। मन्दिर परमारकालीन है। यहाँ अवन्ति खण्ड में वर्णित नौ मातृकाओं में से सातवीं 'कोटरी देवी' है। दोनों नवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष नवरात्रि उत्सव मनाया जाता है।

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चौबीस खम्बा माता मन्दिर चौबीस खम्बा माता मन्दिर

श्री महाकालेश्वर मन्दिर के पास से पटनी बाजार की ओर जाने वाले मार्ग पर यह पुरातन द्वारा 'चौबीस खम्बा' कहलाता है। यह द्वार बहुत प्राचीन है। यहाँ पर १२ वीं शताब्दी का एक शिलालेख लगा हुआ था उसमें लिखा था कि अनहीलपट्टन के राजा ने अवन्ति में व्यापार करने के लिए नागर व चतुर्वेदी व्यापारियों को यहाँ लाकर बसाया था।

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त्रिवेणी नवग्रह (शनि मन्दिर) त्रिवेणी नवग्रह (शनि मन्दिर)

शिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट पर नवग्रह का यह मन्दिर यात्रियों का प्रमुख केन्द्र है। त्रिवेणी घाट के पास शिप्रा नदी पर खान नदी से संगम है. इस नदी का नाम पास ही इन्दौर नगर में बाणगंगा है। कुछ लोग इस नदी को तुंगभद्रा भी मानते थे। त्रिवेणी संगम की कल्पना के साथ अदृश्य नदी सरस्वती की पौराणिक मान्यता इस स्थान के साथ भी जुड़ी हुई है।

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गढ़कालिका मन्दिर गढ़कालिका मन्दिर

यह मन्दिर कालिका देवी को समर्पित है, जो हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार बहुत शक्तिशाली देवी हैं। कालजयी कवि कालिदास गढ़ कालिका देवी के उपासक थे। कालिदास के सम्बन्ध में मान्यता है कि जब से वे इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने लगे तभी से उनके प्रतिभाशाली व्यक्तित्व का निर्माण होने लगा।

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श्री गोपाल मन्दिर श्री गोपाल मन्दिर

महाराजा दौलतराव शिन्दे की धर्मपत्नी बायजाबाई शिन्दे ने अपने आराध्य देव गोपाल कृष्ण का यह मन्दिर उन्नीसवीं शताब्दी में बनवाया था. यह मन्दिर मराठा स्थापत्य कला का सुन्दर उदाहरण है। इस मन्दिर के गर्भगृह में गोपाल कृष्ण के अलावा शिव-पार्वती, और बायजाबाई की प्रतिमाएँ भी हैं।

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 मंगलनाथ मन्दिर  मंगलनाथ मन्दिर

अंकपात के निकट शिप्रा तट के एक टीले पर मंगलनाथ का मन्दिर है। मंगलेश्वर का भव्य मंदिर शिप्रा तट पर स्थित है। मन्दिर के निकट शिप्रा का विशाल घाट है। पौराणिक परंपरा से यह मान्यता है कि उज्जैन मंगलग्रह की जन्मभूमि है। ऐसा भी माना जाता है कि मंगलनाथ के ठीक शीर्ष के ऊपर ही आकाश में मंगलग्रह स्थित है।

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सांदिपनी आश्रम सांदिपनी आश्रम

संदीपनी आश्रम का पौराणिक महत्व है। गुरु सांदीपनि‍ के इस आश्रम में ही श्रीकृष्ण, उनके मित्र सुदामा और भाई बलराम ने शिक्षा ग्रहण की। इस जगह का उल्लेख महाभारत में किया गया है।

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श्री कालभैरव मन्दिर श्री कालभैरव मन्दिर

आठ भैरव की पूजा शैव परंपरा का एक हिस्सा है और इनमें से काल भैरव को प्रधान माना जाता है। कहते हैं कि शिप्रा के तट पर काल भैरव के मंदिर का निर्माण राजा भद्रसेन ने करावाया था। भगवान काल भैरव को उज्जैन नगर का सेनापति भी कहा जाता है और प्रसाद के रूप में मदिरा का भोग लगाया जाता है।

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श्री सिद्धवट मन्दिर (शक्तिभेद तीर्थ) श्री सिद्धवट मन्दिर (शक्तिभेद तीर्थ)

उज्जैन का सिध्दवट प्रयत्न के अक्षयवट, वृन्दावन के वंशीवट तथा नासिक के पंचवट के समान अपनी पवित्रता के लिए प्रसिध्द है। पुण्यसलिला शिप्रा के सिध्दवट घाट पर अन्त्येष्टि-संस्कार सम्पन्न किया जाता है। स्कन्द पुराण में इस स्थान को प्रेत-शिला-तीर्थ कहा गया है। एक मान्यता के अनुसार पार्वती ने यहाँ तपस्या की थी।

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इस्कॉन मन्दिर इस्कॉन मन्दिर

इस्कॉन एक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक संस्था है। जिसकी स्थापना कृष्ण कृपामूर्ति श्रीमद् अभय चरणारविन्द स्वामी प्रभुपाद ने सन 1966 में न्यूयॉर्क शहर में की। अंग्रेजी में इसे International Society for Krishna Consciousness अर्थात अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ कहते है। विश्व के लगभग सभी देशों में इस्कॉन ने अपने केंद्र खोल रखे है।

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पीर मत्स्येन्द्रनाथ पीर मत्स्येन्द्रनाथ

भर्तृहरि गुफा के चारों ओर का क्षेत्र प्राचीन उज्जैन क्षेत्र था। पुरातत्वीय उत्खनन से प्राप्त अवशेष इसकी प्राचीनता सिद्ध करते हैं। यहीं पर 'पीर मत्स्येन्द्रनाथ' की समाधि है। नवनाथों के प्रमुख 'मत्स्येन्द्रनाथ' थे। नाथ सम्प्रदाय के संतों को पीर कहा जाता है अतः 'मत्स्येन्द्रनाथ' को 'पीर' कहा जाता है।

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उज्जैन के अन्य दर्शनीय स्थल

  • रुद्रसागर का मध्यवर्ती टापू
  • विक्रान्त भैरव
  • त्रिवेणी – नवग्रह शनि मंदिर
  • गेबी हनुमान मन्दिर
  • श्री राम मन्दिर
  • श्री योगमाया मन्दिर
  • महाराजवाड़ा
  • अनंत नारायण का मन्दिर
  • रणजीत हनुमान मन्दिर
  • सत्यनारायण का मन्दिर
  • जगदीश मन्दिर
  • श्रीनाथजी का मन्दिर
  • परशुराम मन्दिर, इंदौर मन्दिर
  • चारधाम मन्दिर
  • घंटाघर ( टॉवर चौक )
  • चौरासी महादेव के मन्दिर: विभिन्न चौरासी जगह स्थापित
  • बोहरों का रोजा (उज्जैन का ताजमहल )
  • ऋणमुक्तेश्वर
  • बिजासन टेकरी
  • योगेश्वरी टेकरी
  • पशुपतिनाथ मन्दिर( विनोद मिल ,चामुण्डा माता मन्दिरके सामने )
  • चौसठ योगिनी
  • चारो म्यूजियम
  • तारामंडल
  • कोठी पैलेस
  • हासमपुरा जैन मन्दिर
  • लक्ष्मीनारायण मंदिर
  • तपोभूमि
  • श्री नवदुर्गा मन्दिर
  • श्री तिरुपति धाम मन्दिर
  • वैश्य टेकरी
  • बाबा रामदेव मन्दिर

उज्जैन कैसे पहुँचें

travels उज्जैन भारत में क्षिप्रा नदी के किनारे बसा मध्य प्रदेश का एक प्रमुख धार्मिक नगर है।

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