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शिप्रा जल को स्वच्छ रखने के लिये नदी के किनारे पांच स्थानों पर लग रहे हैं ओजोन गैस प्लांट स्वच्छ शिप्रा अभियान उप समिति द्वारा विभिन्न घाटों का भ्रमण« वापस

31st Mar, 2016

उज्जैन 30 मार्च। स्वच्छ शिप्रा अभियान उप समिति द्वारा बुधवार 30 मार्च को मोक्षदायिनी के विभिन्न घाटों का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। सर्वप्रथम शिप्रा नदी के तटीय क्षेत्र पर बसे ग्राम राघौपिपल्या के समीप खान डायवर्शन के पाइंट का भ्रमण कर व्यवस्थाओं एवं विकास कार्यों का अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान उप समिति के अध्यक्ष श्री मुकेश टटवाल, उपाध्यक्ष श्री मुकेश भंडारी और सदस्यों में सर्वश्री द्वारकाधीश चौधरी, आनंदसिंह खीची, प्रहलाद यादव, संजय शिन्दे, राजेश शर्मा, मुकेश धाकड़, राजेश दिसावल, जुगल मारोठिया, गोपाल सैनी, सुधीर सक्सेना, राधेश्याम परमार, मनीष गांवड़ी, पुरूषोत्तम टेलर, प्रमोद सूद, ब्रजेश राठी, भरत जैन, मुकेश यादव, ध्रुव भार्गव, तुलसी खत्री उपस्थित थे।

उप समिति द्वारा त्रिवेणी घाट पर साफ-सफाई एवं शिप्रा नदी के पानी को स्वच्छ रखने के सम्बन्ध में चर्चा के दौरान लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधीक्षण यंत्री हंसकुमार जैन ने अवगत कराया कि सिंहस्थ के दौरान शिप्रा नदी के विभिन्न पांच स्थानों पर ओजोन गैस के प्लांट लगाये जा रहे हैं, जिनका उपयोग सिंहस्थ के दौरान किया जायेगा। इस प्लांट से पानी में 8 प्रतिशत ऑक्सीजन मिलेगी। वर्तमान में पानी में 3 प्रतिशत ऑक्सीजन है और ऑक्सीजन कम होने के कारण सिंहस्थ के दौरान आने वाले लाखों-करोड़ों श्रद्धालु एवं सन्तों को शिप्रा नदी के पानी में नहाने से बीमारी हो सकती है, इसलिये उसकी रोकथाम एवं स्वच्छता के लिये राज्य शासन ने 9 करोड़ रूपये से ओजोन गैस के पांच स्थानों पर प्लांट लगाये जा रहे हैं।

प्रदूषण को दूर करेगी ओजोन गैस

भ्रमण के दौरान श्री जैन ने बताया कि ओजोन गैस की इकाई लगने से शिप्रा नदी का पानी स्वच्छ रहेगा। साथ ही लाखों-करोड़ों की तादाद में श्रद्धालु एवं सन्तों के स्नान करने से जो ऑक्सीजन की कमी पानी में आयेगी, उसे ओजोन गैस दूर करेगी और पानी स्वच्छ रहेगा। इस दौरान पूरब लॉजिस्टिक्स प्रा.लि. गुड़गांव दिल्ली के प्रबंध संचालक डॉ.रजनीश मेहरा ने रामघाट पर ओजोन गैस की लगी इकाई का निरीक्षण करवा कर सदस्यों को बताया कि ओजोनेशन एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा ऑक्सीजन को ओजोन में परिवर्तित करके  पानी में मिलाया जाता है। इस ओजोन मिश्रित पानी में किसी भी प्रकार के कीटाणु, रसायन, जैव अशुद्धियाँ नहीं टिक पाते ।  पानी के अंतिम शुद्धिकरण के लिए ओजोन विश्व भर में अत्यन्त प्रचलित है। ओजोन के  इसी गुण को देखते हुए आगामी सिंहस्थ के लिए भी इसका प्रयोग क्षिप्रा नदी के जल शुद्धिकरण के लिए किया जा रहा है। इस ध्येय हेतु क्षिप्रा नदी में ५ ओजोनेशन संयंत्र निम्न स्थानों पर लगाए जा रहे हैं:जो रामघाट, गऊघाट, लालपुल, मंगलनाथ और नृसिंह घाट हैं। इन पांचों संयंत्रों में प्रतिदिन १०० ऑक्सीजन सिलेंडर प्रयोग में लाये जायेंगे। अति उच्च तकनीक से बने हर संयंत्र में ४४० वोल्ट की बिजली को पहले १७००० वोल्ट  में  और तदुपरांत  २ लाख वोल्ट में स्टेपअप किया जायेगा ताकि ओजोनिकरन के लिए कोरोना रिएक्शन किया जा सके। कोरोना रिएक्शन  आकाश में बिजली चमकने से  ऑक्सीजन  ऑक्सीजन में विलय के कारण बनने वाली ओजोन के समान ही होता है। धरती पर इस रिएक्शन को साधने में उच्च्तम तकनीक का सहारा  लेना पड़ता है और इसी उच्च्तम तकनीक के सहारे सिंहस्थ कुम्भ के दौरान माँ क्षिप्रा का जल शुद्धतम रख जायेगा।

उन्होंने समिति के सदस्यों को बताया कि ओजोन की एक संतुलित मात्रा के अन्तःक्षेपन से समस्त अशुद्धियों से मुक्ति मिलेगी । सिंहस्थ की संपूर्ण अवधि में यह पाँचों संयंत्र २४ घंटे चलाये जायेंगे। आउटपुट जल भारत सरकार की मानक संस्था के मानक Class B IS: 2296-1982 BIS standards के अनुरुप होगा। दिल्ली की कंपनी पूरब लोजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्थापित यह सारे  संयंत्र scada सॉफ्टवेयर से नियंत्रित होंगे और ओजोनिकरन के फलस्वरूप   पानी में उपस्थित ऑक्सीजन की सही मात्रा को जन-साधारण के लिए LIVE एक LED बोर्ड पर प्रदर्शित किया जायेगा। इस प्रकार के छह बोर्ड लगाने का प्रावधान है। पाँचों संयंत्रों पर ९ करोड़ की लागत आएगी। भारत में पहली बार  एक  चलती नदी को साफ़ किया जा रहा है और किसी कुम्भ को नदी के पानी से होने वाली बीमारियों से पूर्णत: मुक्त रखने का यह एक बहुत बड़ा प्रयास है।

अधीक्षण यंत्री पीएचई श्री जैन ने सदस्यों को खान डायवर्शन की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि खान का पानी शिप्रा में नहीं मिल रहा है और उसकी रोकथाम की व्यवस्था की गई है। आसपास के कृषकों को खेती एवं सब्जी हेतु सिंहस्थ के लिये प्रोत्साहित किया जाये, ऐसा सदस्यों ने आग्रह किया। इस पर श्री जैन ने कहा कि कृषकों को फसल हेतु प्रेरित किया जा रहा है। सदस्यों ने सम्बन्धित अधिकारी से पूछा कि खान डायवर्शन की पाइप लाइन का लालपुल के पास जो कार्य चल रहा है, वह समय पर पूर्ण नहीं हुआ तो उस स्थिति में क्या योजना है। श्री जैन ने इस सम्बन्ध में अवगत कराया कि पम्पिंग कर खान के पानी को डायवर्ट किया जायेगा। हर हालत में खान का पानी शिप्रा में नहीं मिलने दिया जायेगा। सिंहस्थ के दौरान शिप्रा में निरन्तर पानी का फ्लो रहेगा।

भ्रमण के दौरान समिति के सदस्य ने सुझाव दिया कि घाटों पर नदी की गहराई कितनी है, इस सम्बन्ध में साइन बोर्ड लगाये जायें, ताकि श्रद्धालुओं को नदी की गहराई का पता रहे और वह गहरे पानी में न जायें। उप समिति के सदस्यों ने हरिफाटक ओवरब्रिज के समीप राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत पम्पिंग स्टेशन का अवलोकन किया। उज्जैन शहर के 11 नाले शिप्रा नदी में न मिले, इसके लिये अलग-अलग स्थानों पर 9 पम्पिंग स्टेशन हैं। इन गन्दे नालों का पानी इन पम्पिंग स्टेशनों से सदावल को डायवर्ट किया जा रहा है। तत्पश्चात् सदस्यों ने गऊघाट स्थित इंटेकवेल पम्प हाउस और वरूणालय जलशोधन संयंत्र का निरीक्षण किया और जानकारी प्राप्त की। उप समिति के अध्यक्ष श्री मुकेश टटवाल ने सदस्यों को बताया कि राज्य सरकार द्वारा किये गये विकास कार्यों से अन्य साथियों को भी अवगत कराया जाये।

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