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ज्योतिषीय महत्व


कुम्भ मेला हरिद्वार, इलाहाबाद (प्रयाग), नासिक और उज्जैन में बारह वर्षों के अन्तराल से मनाया जाता है। इनमें से सभी स्थानों पर आयोजित होने वाले कुम्भ मेले को विभिन्न राशियों में सूर्य और बृहस्पति की स्थितियाँ निर्धारित करती हैं। हरिद्वार में यह तब आयोजित होता है, जब सूर्य मेष राशि और बृहस्पति कुम्भ राशि में हो। इलाहाबाद (प्रयाग) में यह तब आयोजित होता है, जब सूर्य मकर राशि और बृहस्पति वृष राशि में हो। यह नासिक में तब आयोजित होता है, जब बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करता है। इसके अलावा जब अमावस्या पर कर्क राशि में सूर्य और चन्द्रमा प्रवेश करते हैं, उस समय भी नासिक में कुम्भ का आयोजन होता है। उज्जैन में मेष राशि में सूर्य और सिंह राशि में गुरु के आने पर यहाँ महाकुम्भ मेले का आयोजन किया जाता है, जिसे सिंहस्थ कुम्भ महापर्व के नाम से देशभर में जाना जाता है। सिंहस्थ कुम्भ महापर्व के अवसर पर उज्जैन का धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व स्वयं ही कई गुना बढ़ जाता है। साधु-संतों का एकत्र होना, सर्वत्र पावन स्वरों का गुंजन, शब्द एवं स्वर शक्ति का आत्मिक प्रभाव यहाँ प्राणी मात्र को अलौकिक शान्ति प्रदान करता है। पवित्र क्षिप्रा नदी में पुण्य स्नान की विधियाँ चैत्र मास की पूर्णिमा से प्रारम्भ होती हैं और वैशाख माह की पूर्णिमा तक यह चलता है।

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