simhasthujjain

अखाड़ो का विवरण

सिंहस्थ कुम्भ महापर्व 2016 के दौरान सभी अखाड़े सम्मिलित होते है एवं परंपरागत तरीके से अखाड़ों के सम्मिलित होने से सिंहस्थ कुम्भ महापर्व की शोभा बढ़ती है। अखाड़े अपने पूरे शौर्य एवं दल-बल अनुयायियों के साथ सिंहस्थ कुम्भ महापर्व के दौरान उज्जैन में निवास करते है।

क्र. अखाड़े का नाम श्रीमहंत का नाम पता फोन नं.
1 श्री पंचायती तपोनिधि निरंजनी अखाड़ा सचिव- श्री नरेन्द्र गिरीजी मायापुर, हरिद्वार, उत्तरांचल 0941534086
2 श्री पंचायती आनन्द अखाड़ा सचिव-श्री शंकरानन्द जी सरस्वती, त्रयंबकेश्वर, जिला नाशिक 09422271144
3 श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा सचिव- श्री हरिगिरीजी महाराज, बड़ा हनुमान घाट, काशी, वाराणसी 09411917444
4 श्री पंच दशनामी आह्वान अखाड़ा सभापति- श्री प्रेमपुरीजी महाराज, अश्वमेव घाट, काशी, वाराणसी 09822012180
5 श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा सचिव- श्री रमेशगिरीजी महाराज कनखल, हरिद्वार, उत्तरांचल 09823659544
6 श्री पंच अग्नि अखाड़ा सचिव- श्री गोविन्दानन्दजी महाराज मु.पो. बिलखा, जूनागढ़, सौराष्ट्र 099920477268
7 श्री पंच अटल अखाड़ा सचिव- श्री उदयगिरीजी कनखल, हरिद्वार, उत्तरांचल 09423928913
8 श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा श्री महंत रघुमुनिजी महाराज कीड़गंज, इलाहाबाद, उ.प्र. 09411151000
9 श्री पंचायती उदासीन नया अखाड़ा सचिव- श्री जगतारमुनि महाराज, कनखल, हरिद्वार, उत्तरांचल 09634115882
10 श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा श्री महंत स्वामी ज्ञानदेवसिंह जी कनखल, हरिद्वार, उत्तरांचल 098927202999
11 श्री पंच रामानन्दाय निर्वाणी अनि अखाड़ा श्री महंत धरमदासजी महाराज हनुमान गढ़ी, अयोध्या, उ.प्र. 09453515019
12 श्री पंच दिगंबर अनि अखाड़ा श्री महंत रामकिशनदासजी महाराज 1.अयोध्या, उ.प्र.
2. श्यामदासजी की झाड़ी, वी.पी. नगरिया, दस विश्वा कोसीकला, मथुरा, उ.प्र.
1. 09829599663
2. 08979151955
13 श्री पंच रामान्दीय निर्मोही अनि अखाड़ा श्री महंत राजेन्द्रदासजी जमालपुर, 1. निर्मोही अखाड़ा नागदा
2.जगन्नाथ मंदिर, जमालपुर, अहमदाबाद
09426378846

अखाड़ों के स्थानीय प्रतिनिधियों की सूची

क्र. अखाड़े का नाम श्रीमहंत का नाम पता फोन नं.
1 श्री पंचायती तपोनिधि निरंजनी अखाड़ा श्री विश्वनाथ गिरीजी निरंजनी अखाड़ा बड़नगर रोड़, उज्जैन 07342584765
2 श्री पंचायती आनन्द अखाड़ा
3 श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा पीर महंत परमानन्द पुरीजी जूना अखाड़ा (दत्त अखाड़ा) 07342584666
9977548759
4 श्री पंच दशनामी आह्वान अखाड़ा
5 श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा श्रीमहंत प्रकाशपुरीजी महाराज श्रीमहाकाल मंदिर, उज्जैन 07342556853
9425091453
07342558833
6 श्री पंच अग्नि अखाड़ा श्री सुदामानन्दजी राजराजेश्वर श्री हनुमान मंदिर, पुल के नीचे, सिंधिया धर्मशाला के पास, उज्जैन 9424045931
9752215861
7 श्री पंच अटल अखाड़ा श्री प्रेमगिरीजी 9406660467
8 श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा श्यामदासजी महाराज 07342585653
9425093555
9 श्री पंचायती उदासीन नया अखाड़ा श्री सर्वेश्वर मुनि गोलामंडी, उज्जैन 9993737150
10 श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा श्री सतनामसिंह बड़नगर रोड़, उज्जैन 07342584915
9827303364
11 श्री पंच रामानन्दाय निर्वाणी अनि अखाड़ा श्री दिग्विजयदास खाकचैक, उज्जैन 2554665
2580106
09822649144
12 श्री पंच दिगंबर अनि अखाड़ा श्री रामचन्द्रदास अंकपात मार्ग, उज्जैन. 9826457213
13 श्री पंच रामान्दीय निर्मोही अनि अखाड़ा श्री महेशदास जी खाकचैक, उज्जैन 9827577845
07342580729

समस्त अखाड़ों की पेशवाई के स्थान

क्र. अखाड़े का नाम पेशवाई प्रारंभ स्थल पेशवाई समापन स्थल
1 पंचदशनामजूना अखाड़ा नीलगंगा दत्त अखाडा
2 पंचायती आनंद अखाड़ा नीलगंगा छोटी रपट, बड़नगर रोड
3 पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा नीलगंगा दत्त अखाड़ा
4 निर्वाणी अनि अखाड़ा बेगमपुरा अंकपात
5 निर्मल अखाड़ा संख्याराजे धर्मशाला रामघाट
6 दिगंबर अनि अखाड़ा बेगमपुरा खाक चौक
7 निर्मोही अखाड़ा बेगमपुरा अंकपात
8 पंचायती नया उदासीन अखाड़ा सिन्धी कॉलोनी बडनगर रोड, हनुमान बाग़
9 पंच अटल अखाड़ा नीलगंगा दत्त अखाडा
10 तपोनिधि निरंजनी अखाड़ा संख्याराजे धर्मशाला दानीगेट, राजपूत धर्मशाला
11 पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा अलखधाम धर्मशाला दानीगेट, राजपूत धर्मशाला
12 पंचायती अग्नि अखाड़ा नीलगंगा दत्त अखाड़ा
13 पंचायती आव्हान अखाड़ा नीलगंगा दत्त अखाड़ा

तिलक का परिचय (ललाट पर लगे तिलक से पंथ की पहचान)

संतों के ललाट पर लगे तिलक से संतों के सम्प्रदाय एवं पंथ की पहचान होती है। इस समय सिंहस्थ महाकुंभ मेला क्षेत्र में अलग-अलग अखाड़ों के साधु-संतों के मस्तक पर आकर्षक तिलक सभी को आकर्षित करते हैं। मस्तक एवं शरीर के अन्य भागों पर लगाये जाने वाले तिलक के संबंध में संत-महात्माओं के अलग-अलग मत है। मुख्य रूप से तीन प्रकार के सम्प्रदाय विशेष के संतों द्वारा चंदन, गोपी चंदन एवं रोली से तिलक लगाया जाता है। तीन प्रकार के तिलक मुख्य रूप से संतों की पहचान का बोध कराते हैं। 1. वैष्णव सम्प्रदाय द्वारा ऊर्ध्वपुण्ड्र लगाया जाता है, शैव सम्प्रदाय द्वारा ऊर्ध्वपुण्ड्र लगाया जाता है। इसी प्रकार शाक्त सम्प्रदाय के अनुयायी रोली का तिलक ललाट पर लगाते हैं।

महंत श्री नृत्यगोपालदास महाराज ने तिलक की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि तिलक एवं शिखा भारतीय संस्कृति की पहचान है, जिस तरह साधारण मनुष्य शृंगार करते हैं उसी प्रकार यह साधु का एक मुख्य आभूषण है। वैष्णव सम्प्रदाय के ब्रह्मचारी श्री बापोली वालों का कहना है कि तिलक लगाना तीनों अवस्थाओं जाग्रत, स्वप्न एवं सुशुप्ति से ऊपर उठने में सहायक होता है एवं प्रभु को आत्मसात करने का माध्यम होता है। उन्होंने कहा कि तिलक लगाने का भौतिक उद्देश्य भी है। उन्होंने तिलक का भौतिक महत्व को प्रतिपादित करते हुए कहा कि आज के दौर में मनुष्य व्यर्थ चिंतन एवं मनन करता रहता है। उससे मस्तिष्क में उष्मा उत्पन्न होती है एवं तिलक उस उष्मा को शांत करने में सहायक होता है।

शैव सम्प्रदाय को मानने वाले त्रिपुण्ड्र लगाते हैं। वे इसकी तुलना ऊँकार से करते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि तिलक वैष्णवों और शैवों में एकता का प्रतीक भी है। ऐसी मान्यता है कि वैष्णव भगवान शंकर का त्रिशूल उध्र्वपुण्ड्र के रूप में मस्तक पर लगाते है एवं शैव सम्प्रदाय को मानने वाले तिलक के रूप में भगवान श्रीराम के धनुष को धारण करते हैं।

शक्ति के उपासक शाक्त सम्प्रदाय के उपासक रोली का या काला तिलक लगाते हैं। वे इसे तेजोमय बिन्दु भी कहते हैं। इस बारे में दिल्ली से पधारे शाक्त सम्प्रदाय के उपासक श्री कापालिक महाकाल भैरवानंद सरस्वती जी का कहना है कि भारतीय संस्कृति के अनुसार स्त्री के लिए उसका सुहाग सर्वोच्च है एवं सुहाग की निशानी के तौर पर लाल रंग की रोली से मांग भरती है, ठीक उसी प्रकार हम लोग लाल रंग का तिलक एक सीधी खड़ी लकीर के रूप में लगाते एवं जो यह तिलक लगाता है वह अभागा नहीं होता। तिलक सौभाग्य की निशानी है एवं तिलक इस बात का बोध कराता है कि परमात्मा एक है।

उज्जैन कैसे पहुँचें

travels उज्जैन भारत में क्षिप्रा नदी के किनारे बसा मध्य प्रदेश का एक प्रमुख धार्मिक नगर है।

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